दिसंबर 1972 में ‘अपोलो 17’ के बाद से इंसान ने चाँद की सतह या उसके करीब कदम नहीं रखा है। लेकिन अब इंतज़ार खत्म होने वाला है। NASA का आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है।
यह सिर्फ एक मिशन नहीं, बल्कि मंगल ग्रह (Mars) तक पहुँचने की दिशा में मानवता का पहला बड़ा कदम है। आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक मिशन के बारे में सब कुछ।
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क्या है Artemis II मिशन? (What is Artemis II?)
Artemis II, नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम का दूसरा चरण है। जहाँ ‘आर्टेमिस I’ एक मानवरहित (uncrewed) मिशन था, वहीं आर्टेमिस II पहला चालक दल वाला (crewed) मिशन होगा।
- लॉन्च की तारीख: 6 फरवरी, 2026 (संभावित)
- अवधि: 10 दिनों का मिशन
- रॉकेट: स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS)
- अंतरिक्ष यान: ओरियन (Orion Spacecraft)
कौन हैं वो 4 जांबाज अंतरिक्ष यात्री?आर्टेमिस II का चालक दल न केवल कौशल में माहिर है, बल्कि यह मिशन मानवता की विविधता का भी प्रतिनिधित्व करता है। इसमें निम्नलिखित चार सदस्य शामिल हैं:
जेरेमी हेंसन (Jeremy Hansen): कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) के हेंसन इस दल में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक हैं। वे गहरे अंतरिक्ष में जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी होंगे।
रीड वाइसमैन (Reid Wiseman): मिशन कमांडर के रूप में, वाइसमैन इस ऐतिहासिक यात्रा का नेतृत्व करेंगे। वे पहले भी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर समय बिता चुके हैं।
विक्टर ग्लोवर (Victor Glover): मिशन के पायलट के रूप में, ग्लोवर चाँद के मिशन पर जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति बनकर इतिहास रचेंगे।
क्रिस्टीना कोच (Christina Koch): मिशन स्पेशलिस्ट कोच, अंतरिक्ष में सबसे लंबे समय तक रहने वाली महिला का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं। वे अब चंद्रमा के मिशन पर जाने वाली पहली महिला बनेंगी।
मिशन का रूट: फ्री-रिटर्न प्रक्षेपवक्र (Free-Return Trajectory)
Artemis II सीधे चाँद पर लैंड नहीं करेगा। यह ‘फ्री-रिटर्न ट्रेजेक्टरी’ का पालन करेगा। इसका मतलब है कि ओरियन यान पृथ्वी से उड़ान भरेगा, चाँद के पीछे से चक्कर लगाएगा और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करके प्राकृतिक रूप से वापस पृथ्वी की ओर मुड़ जाएगा।
मिशन के मुख्य पड़ाव:
- SLS लॉन्च: दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट ओरियन को अंतरिक्ष में भेजेगा।
- पृथ्वी की कक्षा: पहले यान पृथ्वी की कक्षा में प्रणालियों की जांच करेगा।
- चंद्र परिक्रमा: अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के दूसरी तरफ (Far side) से गुजरेंगे, जहाँ से वे पृथ्वी को एक नीले गोले के रूप में देख पाएंगे।
- स्प्लैशडाउन: 10 दिनों के बाद, यान प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंड करेगा।
Artemis II का इतिहास और बदलाव
शुरुआत में, इस मिशन को Exploration Mission-2 (EM-2) के नाम से जाना जाता था। उस समय इसका उद्देश्य नासा के ‘एस्टेरॉयड रिडायरेक्ट मिशन’ (जो अब रद्द हो चुका है) का समर्थन करना था। हालांकि, 2017 में जब आर्टेमिस प्रोग्राम की घोषणा हुई, तो इस मिशन के उद्देश्यों को पूरी तरह से चाँद और उससे आगे (मंगल) के लिए बदल दिया गया।
Artemis II इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
यह मिशन भविष्य के आर्टेमिस III के लिए नींव रखेगा, जिसका लक्ष्य इंसान को फिर से चाँद की सतह पर उतारना है। इसके जरिए नासा ओरियन यान के लाइफ सपोर्ट सिस्टम, संचार और नेविगेशन की क्षमता को परखेगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इंसान गहरे अंतरिक्ष में सुरक्षित रह सकते हैं।
दिलचस्प तथ्य: आर्टेमिस II को पहले ‘एक्सप्लोरेशन मिशन-2’ (EM-2) के नाम से जाना जाता था और इसे एक एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह) मिशन के लिए डिजाइन किया गया था, जिसे बाद में बदल दिया गया।
निष्कर्ष
आर्टेमिस II मिशन विज्ञान, साहस और अंतरराष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। 2026 में होने वाला यह लॉन्च यह तय करेगा कि क्या हम आने वाले दशक में चाँद पर अपना स्थायी बेस बना पाएंगे या नहीं।
wiki https://en.wikipedia.org/wiki/Artemis_II
इस मिशन की ताज़ा जानकारी आप NASA की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।
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